सरकारी दावों के बीच स्कूली शिक्षा की चिंताजनक तस्वीर सामने आई
प्राक्कलन समिति की रिपोर्ट में खुलासा – प्राथमिक में 6.18 करोड़ बच्चों का नामांकन, सीनियर सेकेंडरी तक पहुंचते-पहुंचते संख्या घटकर 1.64 करोड़ रह जाती है रह जाती है
नई दिल्ली।
सरकारी दावों के बीच स्कूली शिक्षा की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। संसद की प्राक्कलन समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी स्कूल में प्राथमिक स्तर पर दाखिला लेने वाले हर 100 बच्चों में से केवल 27 ही सीनियर सेकेंडरी (12वीं) तक पहुंच पाते हैं। 73% बच्चे 12वीं से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।
समिति ने चेतावनी दी है कि अगर बच्चों को स्कूल में रोके रखने की चुनौती का समाधान नहीं किया गया तो सार्वभौमिक शिक्षा का लक्ष्य सिर्फ आंकड़ों तक सीमित रह जाएगा।
आंकड़ों में गिरावट – कहां कितने बच्चे?
रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार –
| स्तर | नामांकित बच्चे (करोड़ में) | स्कूलों की संख्या (लाख में) |
|---|---|---|
| प्राथमिक | 6.18 | 9.11 |
| उच्च प्राथमिक | 4.08 | 4.12 |
| माध्यमिक | 2.36 | 1.61 |
| उच्च माध्यमिक | 1.64 | 0.90 |
प्राथमिक के मुकाबले सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या सिर्फ 10% है। 2014-15 से 2024-25 के बीच स्कूलों की कुल संख्या 15.17 लाख से घटकर 14.71 लाख रह गई, जबकि शिक्षकों की संख्या 85.62 लाख से बढ़कर 1.01 करोड़ हो गई। इसके बावजूद माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 11.5% बनी हुई है।
बच्चे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं? रिपोर्ट में 4 बड़े कारण
1. कमजोर बुनियादी नींव: प्राथमिक स्तर पर पढ़ने-लिखने और गणित की बुनियादी क्षमता कमजोर।
2. स्कूलों की दूरी: गांव-देहात में सीनियर सेकेंडरी स्कूल दूर होने से बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
3. आर्थिक-सामाजिक दबाव: गरीब परिवार के लड़कों पर मजदूरी का दबाव, लड़कियों के लिए सुरक्षा और दूरी बड़ी बाधा।
4. शिक्षक प्रशिक्षण में गिरावट: 2022 में 53 लाख से अधिक शिक्षकों ने ऑनलाइन प्रशिक्षण लिया था, 2025 में यह घटकर मात्र 1.63 लाख रह गया।
समिति की 3 बड़ी सिफारिशें
1. ‘निपुण भारत’ योजना कड़ाई से लागू हो: ताकि शुरुआती कक्षाओं में ही बच्चों की बुनियादी समझ मजबूत हो।
2. मजबूत स्टूडेंट ट्रैकिंग सिस्टम: हर बच्चे की उपस्थिति और प्रगति की रियल-टाइम डिजिटल ट्रैकिंग हो।
3. शिक्षक प्रशिक्षण का सालाना लक्ष्य: ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण को निरंतर जारी रखा जाए।










