ऑक्सफोर्ड सर्वे में बदली सोच की तस्वीर: अब विदेश की डिग्री को ‘बसने’ नहीं, ग्लोबल एक्सपीरियंस हासिल करने का रास्ता मान रहे युवा; 49% ने कहा- विदेश जाने का फैसला हमारा अपना

नई दिल्ली। विदेश जाना है… लेकिन हमेशा के लिए नहीं! भारतीय युवाओं की विदेश पढ़ाई को लेकर सोच में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल के स्टूडेंट ग्लोबल मोबिलिटी इंडेक्स सर्वे में शामिल 81% भारतीय छात्रों ने कहा कि वे विदेश में पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत लौटना चाहते हैं। यानी करीब 10 में से 8 छात्र विदेशी डिग्री के बाद अपना भविष्य भारत में देख रहे हैं।
कभी विदेश में पढ़ाई को बेहतर नौकरी और वहीं बसने की पहली सीढ़ी माना जाता था। अब युवा विदेश को शिक्षा, अनुभव, एक्सपोजर और ग्लोबल नेटवर्किंग का ठिकाना मान रहे हैं। पढ़ाई पूरी होगी, अनुभव मिलेगा और फिर उसी अनुभव के साथ भारत लौटकर करियर बनाने की तैयारी है।
सबसे बड़ा बदलाव: अब पैरेंट्स नहीं, बच्चे तय कर रहे विदेश जाना
सर्वे में विदेश जाने के फैसले को लेकर भी बड़ा बदलाव सामने आया है। 2025-26 में 49% छात्रों ने कहा कि विदेश जाकर पढ़ाई करने का फैसला उनका अपना था।
दो साल पहले यह आंकड़ा सिर्फ 29% था। यानी युवाओं में अपने करियर को लेकर निर्णय लेने की स्वतंत्रता तेजी से बढ़ी है।
विदेश जाने का फैसला खुद लेने वाले छात्र
2023-24 : 29%
2024-25 : 34%
2025-26 : 49%
यानी 2 साल में फैसला खुद लेने वालों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत अंक बढ़ी।
10 में 9 के परिवार में पहली बार कोई विदेश पढ़ने जाएगा
विदेश शिक्षा अब केवल उन परिवारों तक सीमित नहीं है, जहां पहले से कोई विदेश में पढ़ चुका है। सर्वे में करीब 10 में 9 छात्र अपने परिवार में पहली बार विदेश जाकर पढ़ाई करने वाले होंगे।
यानी पहली पीढ़ी के विद्यार्थी अब ग्लोबल एजुकेशन की दौड़ में तेजी से शामिल हो रहे हैं। इनके लिए सबसे बड़ा सहारा बना है—इंटरनेट।
गूगल बना विदेशी यूनिवर्सिटी खोजने का नया ठिकाना
विदेशी संस्थान चुनने के लिए छात्र एजेंटों से ज्यादा खुद ऑनलाइन रिसर्च कर रहे हैं।
39% छात्रों को अपनी पसंद का संस्थान गूगल सर्च के जरिए मिला, जबकि 35% ने एजुकेशन एजेंट्स से जानकारी ली।
भरोसे की बात आई तो भी गूगल सबसे आगे रहा।
गूगल : 56%
कॉलेज इवेंट्स : 20%
इंस्टाग्राम : 9%
एआई टूल्स : 6%
यूट्यूब : 5%
यानी विदेश जाने से पहले अब युवा किसी एजेंट के ऑफिस में बैठकर सिर्फ ब्रोशर नहीं पलट रहे। मोबाइल खोल रहे हैं, गूगल पर सर्च कर रहे हैं, सोशल मीडिया देख रहे हैं और एआई से सवाल पूछ रहे हैं।
बिजनेस-मैनेजमेंट सबसे पसंदीदा
विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की पढ़ाई की पसंद भी दिलचस्प है।
सबसे पसंदीदा क्षेत्र
बिजनेस-मैनेजमेंट : 75%
पोस्टग्रेजुएशन : 70%
हेल्थ और मेडिसिन : 8%
साइंस : 2%
इंजीनियरिंग : 1%
विदेश की डिग्री, भारत में वापसी… आखिर क्यों?
सर्वे के आंकड़े एक नई कहानी कहते हैं। भारतीय छात्र ग्लोबल एक्सपोजर चाहते हैं, लेकिन अपनी जड़ें छोड़ना जरूरी नहीं समझते।
विदेश में पढ़ाई अब कई युवाओं के लिए ‘फाइनल डेस्टिनेशन’ से ज्यादा ‘करियर एक्सपीरियंस’ बनती जा रही है।
यानी सोच कुछ ऐसी है—
“डिग्री वहां से… अनुभव वहां का… लेकिन करियर अपने देश में।”
डेटा में छिपी बड़ी तस्वीर
81% — पढ़ाई के बाद भारत लौटना चाहते हैं49% — विदेश जाने का फैसला खुद लिया10 में करीब 9 — परिवार में पहली बार विदेश पढ़ने जाएंगे56% — जानकारी के लिए गूगल पर सबसे ज्यादा भरोसा75% — बिजनेस-मैनेजमेंट की ओर झुकाव
बदल रहा है ‘विदेश जाने’ का मतलब
विदेश जाने की इच्छा कम नहीं हुई है। बल्कि भारतीय युवाओं में ग्लोबल एजुकेशन का आकर्षण बना हुआ है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब विदेश जाना ‘वहीं बस जाने’ का पर्याय नहीं रह गया।
नई पीढ़ी विदेश से सीखना चाहती है, दुनिया देखना चाहती है, अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करना चाहती है और फिर उस अनुभव को भारत में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है।
यानी मंजिल विदेश नहीं… मंजिल बेहतर करियर है। और रास्ता चाहे जितना लंबा हो, लौटने का रास्ता भारत की ओर भी खुला है।








