
नई दिल्ली,// भाषा हमेशा बदलती रही है, यह बदलाब अस्वाभाविक नहीं माना जाता है लेकिन इस डिजिटल दौर में यह बदलाव पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गया है। जेन जी (Generation Z – 1997 से 2012 के बीच जन्मे) की नई शब्दावली जिसे आमतौर पर ‘स्लैंग’ कहा जाता है, अब सिर्फ मजाक या ट्रेंड नहीं रह गई, बल्कि एक तरह का ‘कोड’ बन चुकी है। ऐसा कोड, जो कुछ लोगों को जोड़ता है और बाकी को बाहर कर देता है।
बूमर्स (1946-1964) और यहाँ तक कि मिलेनियल्स (1981-1996) के लिए उन्हें समझना मुश्किल हो रहा है।
स्लैंग क्यों समझ नहीं आते?
ये शब्द अक्सर संदर्भ (context) पर निर्भर होते हैं, और पुराना जनरेशन, जो औपचारिक भाषा का आदी है, इन्हें “आलसी” या “बेतुका” मान लेता है।
दिलचस्प बात यह है कि इस बदलती भाषा को समझने की कोशिश सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े सितारे और नेता भी कर रहे हैं लेकिन अक्सर नाकाम रहते हैं।
ये शब्द अक्सर पारंपरिक अंग्रेजी अर्थों से बिल्कुल अलग होते हैं, जो बातचीत में भ्रम पैदा करते हैं। जेन ज़ी पीढ़ी की अपनी अलग भाषा है, जो वाक्यों में कम और स्लैंग में ज्यादा बातें करती है। ये जनरेशन टेक्नो-सेवी है और सोशल मीडिया में माहिर है।
इस तरह पहले भी हो चुके हैं बदलाव!
असल में यह पहली बार नहीं है जब नई पीढ़ी ने अपनी अलग भाषा बनाई हो। 1970 के दशक में ‘ग्रोवी’ और ‘बमर’, 1980 में ‘रेडिकल’ और ‘डवीब’ और 1990 में ‘सप’ और ‘एज इफ’ जैसे शब्द आए। हर दौर में ऐसे शब्द रहे हैं, जो उस समय के युवाओं की पहचान बनते थे और बड़ों को ‘आउटसाइडर’ जैसा महसूस कराते थे। लेकिन जेन जी स्लैंग सिर्फ मजेदार या स्टाइलिश नहीं है। यह सामाजिक और राजनीतिक अनुभवों को भी व्यक्त करती है। उदाहरण के लिए मैन्सप्लैनिंग(जब पुरुष महिलाओं को जरूरत से ज्यादा समझाते हैं), गैसलाइटिंग (किसी को मानसिक रूप से भ्रमित करना), घोस्टिंग (अचानक संपर्क तोड़ देना) और कैंसल कल्बर (गलत व्यवहार पर सार्वजनिक बहिष्कार) जैसे शब्द सिर्फ ट्रेंड नहीं हैं, बल्कि समाज में मौजूद समस्याओं को नाम देते हैं और उन्हें सामने लाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार,
जेन जी स्लैंग एक तरह की ‘माइक्रो-सोसाइटी’ बना रही है। जो लोग इन शब्दों को समझते हैं, वे एक समूह का हिस्सा बन जाते हैं। हालांकि पहले स्लैंग धीरे-धीरे फिल्मों, किताबों या पॉप कल्चर के जरिए फैलती थी। इंटरनेट ने अभी इसे वैश्विक बना दिया है।
रेयान गोसलिंग भी अटके
हॉलीवुड अभिनेता रेयान गोसलिंग ने अपनी फिल्म प्रोजेक्ट हैल मेरी के प्रमोशनल वीडियो में जेन जी स्लैंग इस्तेमाल करने की कोशिश की। उन्होंने ‘टी’ (गॉसिप), ‘स्ले’ (शानदार करना), ‘नो कैप’ (सच कहना) जैसे शब्द बोले। लेकिन यही वीडियो मजेदार इसलिए बन गया क्योंकि यह सब उनके मुंह से ‘नेचुरल’ नहीं लग रहा था। उनकी कोशिश में एक अजीब-सी असहजता दिखी और वही दर्शकों के लिए हंसी का कारण बन गई।
भारत में भी यही हाल
भारत में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहां है। युवा कलाकार जैसे अनन्या पांडे आसानी से ‘एनजीएल’ (नॉट गोना लाई) या ‘गिविंग’ जैसे शब्द समझा देती हैं, जबकि कई वरिष्ठ कलाकार इन शब्दों से अनजान नजर आते हैं। दूसरी ओर डलकोर सलमान जैसे कुछ अभिनेता इन शब्दों को समझते हैं और इसका श्रेय अपने जेन जी परिवार के सदस्यों को देते हैं। राजनीति भी इससे अछूती नहीं है। राहुल गांधी से जब छात्रों ने ‘पोकी’ (प्यार से बुलाने वाला शब्द) और ‘रिज्ज’ (आकर्षण/करिश्मा) का मतलब पूछा, तो उन्होंने मजाक में कहा- ‘अब मैं फंस गया हूं।’ इसी तरह शशि थरूर जैसे शब्दों के उस्ताद नेता भी ‘फिन्स्ट्रा’ (फेक इंस्टाग्राम) और ‘ओओटीडी’ (आउटफिट ऑफ द डे) जैसे शब्द नहीं पहचान पाए।
अभी हाल ही में मनोज बाजपेयी से इंटरव्यू में पूछा गया कि ‘बेंचिंग’ किसे कहते हैं, तो उसपर उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ‘’बेंचिंग तो उसे कहते हैं जो बैंच पर बैठते हैं’’ इसपर सभी हंसने लगे, लेकिन जवाब गलत था जिसके बाद उन्हें सही किया गया
इसपर एंकर ने समझाया कि रिलेशनशिप में बैंचिंग का मतलब होता है किसी को उम्मीद में लगाए रखना। यानी सामने वाला आपमें दिलचस्पी दिखाता है, लेकिन असली रिश्ते में आने से बचता है। वो आपको एक तरह से “साइड ऑप्शन” की तरह रखता है। जब उसे अकेलापन महसूस हो या इमोशनल सपोर्ट चाहिए हो, तभी वो आपको याद करता है। बाकी समय वो आपको इग्नोर करता रहता है। ऐसे में इंसान को लगता है कि रिश्ता आगे बढ़ेगा, लेकिन असल में दूसरा सिर्फ अपनी सुविधा के लिए आपको पकड़े रखता है
दिग्गजों को परेशान करने वाले प्रमुख जेन जी स्लैंग (Gen Z Slang Dictionary):
- Rizz (रिज़): ‘Charisma’ (आकर्षण) शब्द से बना है, जिसका अर्थ है किसी को आकर्षित करने या रिझाने की क्षमता।
- Sus (सस): ‘Suspicious’ का संक्षिप्त रूप, जिसका अर्थ है संदेहास्पद या जिस पर भरोसा न किया जा सके।
- Bet (बेट): किसी बात से सहमति जताना या ‘हाँ’ या ‘ठीक है’ के अर्थ में उपयोग होता है।
- Slay (स्ले): बहुत अच्छा प्रदर्शन करने या अद्भुत दिखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
- Gyatt (ग्याट): सोशल मीडिया पर अक्सर किसी व्यक्ति की तारीफ (क्यूट) के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द।
- Pookie (पूंकी): किसी बेहद प्यारे या करीबी दोस्त के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला निकनेम।
- No Cap (नो कैप): ‘कोई झूठ नहीं’ या ‘सच में’ (Honestly) के अर्थ में, जो बात की सच्चाई पर जोर देता है।
- Delulu (डेलुलू): ‘Delusional’ का संक्षिप्त रूप, जो अव्यावहारिक मान्यताओं या कल्पनाओं को दर्शाता है।
- Mid (मिड): औसत दर्जे का या कम गुणवत्ता (Mediocre) वाली चीज़ के लिए।
- Yeet (यीत): किसी वस्तु को उत्साह या जोर से फेंकना।
- Ick (इक्क): किसी व्यक्ति से अचानक घृणा या नापसंदगी महसूस होना।
- Sigma (सिग्मा): सोशल मीडिया पर लोकप्रिय एक व्यक्तित्व प्रकार, जिसे अक्सर आत्मविश्वासी या सफल के रूप में देखा जाता है।







