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Home जीवन शैली जीवन मन्त्र

कितनी बार दिल पर दस्तक देता है शिद्दत भरा प्यार..?

News Desk by News Desk
February 13, 2026
in जीवन मन्त्र, जीवन शैली, रोचक, विशेष खबर
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कितनी बार दिल पर दस्तक देता है शिद्दत भरा प्यार..?
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नई दिल्ली// बशीर बद्र की ग़ज़ल की पक्तियां हैं कि

प्यार की नई दस्तक दिल पे फिर सुनाई दी,

चाँद सी कोई सूरत ख़्वाब में दिखाई दी।

किस ने मेरी पलकों पे तितलियों के पर रक्खे

आज अपनी आहट भी देर तक सुनाई दी।

जिंदगी  में सभी ने कभी न कभी एक ऐसे पलों  को महसूस जरूर किया होता है जिसमें किसी को देखकर या मिलकर पेट में तितलियां उड़ने का सा अहसास होता है, जिसे प्यार का नाम दिया जाता है। इस  अहसास या अनुभव को लेकर फिल्म गीत  और साहित्य  भरा पड़ा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा जीवन में कितनी बार होता है?

जिंदगी में दो बार प्यार होता है” यह एक आम धारणा है, जो अक्सर दो अलग-अलग तरह के प्यार को दर्शाती है: पहला प्यार जो आकर्षण, जुनून या वासना पर आधारित होता है, और दूसरा सच्चा प्यार जो समझ, सम्मान और गहरे जुड़ाव से आता है, जो पहले अनुभव से सीखकर आता है और अधिक परिपक्व होता है; कई लोगों के लिए, पहला प्यार मोहभंग के बाद दूसरा सच्चा प्यार मिलने का अवसर देता है, जिससे वे जीवन में अलग-अलग रिश्तों से सीखते और बढ़ते हैं। 

पहला प्यार

यह अक्सर शुरुआती आकर्षण, सुंदरता, या किसी व्यक्ति के गुणों से होता है, जैसा कि किसी तुर्की कहावत में बताया गया है।यह बहुत तीव्र और जुनूनी हो सकता है, जिसमें व्यक्ति दूसरे को अपनी पूरी दुनिया मान लेता है। 

दूसरा प्यार इसे ट्रु लव भी कहते हैं

यह अक्सर पहले प्यार के अनुभवों से सीखकर आता है, जहाँ व्यक्ति समझता है कि सच्चा प्यार सिर्फ दिखावे या आकर्षण से नहीं, बल्कि आपसी समझ और समर्थन से बनता है। यह पहले प्यार की तरह ही गहरा हो सकता है, लेकिन यह अधिक परिपक्व और टिकाऊ होता है क्योंकि इसमें अपेक्षाएँ कम और स्वीकृति अधिक होती है। 

क्यों होता है दूसरा प्यार?

अनुभव से सीखना: पहला रिश्ता टूटने के बाद व्यक्ति यह सीखता है कि उसे क्या चाहिए और क्या नहीं, जिससे वह दूसरे रिश्ते में बेहतर चुनाव कर पाता है।

परिपक्वता: समय के साथ, लोग भावनात्मक रूप से परिपक्व होते हैं और प्यार को एक अलग नज़र से देखते हैं, जहाँ वे साथी की कमियों को स्वीकार करते हैं और रिश्ते को बेहतर बनाते हैं।

अलग-अलग रूप: प्यार के कई रूप होते हैं, जैसे माँ-पिता से प्यार, दोस्तों से प्यार, और जीवनसाथी से प्यार; ये सभी अलग-अलग स्तरों पर होते हैं, और हर अनुभव अपने आप में अनूठा होता है। 

संक्षेप में, “दो बार प्यार” का मतलब अक्सर यह है कि जीवन में आप अलग-अलग समय पर अलग-अलग लोगों से अलग-अलग तरह का प्यार अनुभव करते हैं, और दूसरा प्यार अक्सर पहले से मिली सीख का परिणाम होता है, जो गहरा और सच्चा हो सकता है।

क्या कहता है नया अध्ययन?

अमेरिका के इंडियाना यूनिवर्सिटी के किन्से इंस्टीट्यूट के एक नए अध्ययन ने इस पर से कुछ पर्दा उठाया है और नतीजा थोड़ा अलग है। इस अध्ययन के शोधकर्ताओं ने 18 से 99 वर्ष की आयु के 10,036 अविवाहितों से सीधा सवाल पूछा कि अपने जीवन में आप कितनी बार जुनूनी (पैशनेट) प्यार में पड़े हैं। अध्ययन के अनुसार औसत जवाब था कि सिर्फ दो बार (सटीक रूप से 2.05 बार) । नतीजों को विस्तार से देखें तो 14 फीसदी लोगों ने कहा कि वे कभी ऐसे जुनूनी प्यार में नहीं पड़े, 28 फीसदी ने कहा एक बार, 30 फीसदी ने दो बार, 17 फीसदी ने तीन बार, और 11 फीसदी ने चार या उससे अधिक बार। 58 फीसदी ने कहा एक या दो बार ही किया जुनूनी हद वाला प्यार . विषमलैंगिक, समलैंगिक, उभयलिंगी सभी में अंतर बहुत मामूली पाया गया।

उम्र दराज लोगों जुनूनी प्यार का ज्यादा अनुभव

मजे की बात है कि उम्रदराज लोगों ने युवाओं की तुलना में थोड़ा अधिक बार ऐसे प्यार का अनुभव बताया, यानी क्यूपिड कभी रिटायर नहीं होता। पुरुषों ने महिलाओं की तुलना में थोड़ा अधिक संख्या बताई, लेकिन यह अंतर भी बहुत छोटा था। जुनूनी प्यार किसी भेदभाव को नहीं मानता, यह एक तरह से सबको बराबरी पर ले आता है। थेरेपिस्ट्स के लिए भी यह डेटा अहम है, क्योंकि यह याद दिलाता है कि लगातार आतिशबाजी जैसा रोमांच महसूस करना सामान्य नहीं है। साथीभाव पर आधारित स्थिर और गहरा प्यार वही असली लंबी दौड़ का विजेता है। रिपोर्ट बताती है कि 60 फीसदी सिंगल खुद को बहुत रोमांटिक मानते हैं।

निष्कर्ष:

  • यह स्टडी बताती है कि ‘सोलमेट’ (एक ही सच्चा प्यार) की धारणा के बजाय, शिद्दत वाला प्यार एक दुर्लभ लेकिन दोहराया जाने वाला अनुभव है.
  • यह प्यार हर किसी के लिए अलग-अलग रूप में आता है, और ज़्यादातर लोगों के लिए यह जीवन में कई बार हो सकता है, न कि सिर्फ एक बार. 

लोग प्यार में पड़ने की बातें तो लगातार करते हैं, लेकिन यह पहला बड़ा अध्ययन है जिसने दिखाया है कि यह वास्तव में कितना दुर्लभ है। अधिकांश लोगों के लिए यह आतिशबाजी जैसा जुनून जीवन में गिनी-चुनी बार ही आता है फिर जिंदगी अपनी रफ्तार पकड़ लेती है।

– डॉ अमांडा गेसलमैन

अध्ययन की प्रमुख लेखिका और किंसे की वैज्ञानिक

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