कांग्रेस की जिला कार्यकारणी के लिए अभी करना होगा इंतजार….?
भोपाल// वैसे तो जोर शोर से शुरू हुए कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत 15फरवरी तक प्रदेश भर में जिला कार्यकारणी घोषित हो जानी थीं , नेताओं और कार्यकर्ताओं को इसका बेसब्री से इंतजार भी था, अब यह इंतजार थोड़ा लंबा हो गया है, वैसे एक पखवाड़े पहले करीब 4 जिला कांग्रेस कमेटियां घोषित भी कर दी गईं थीं, पर अब अखिल भारतीय कांग्रेस ने इस पर रोक लगा दी है कहा जा रहा है कि अब नए सिरे से जिला कार्यकारणी गठित की जाएंगी, और यह सब फरवरी माह के अंत तक होने की संभावना है।
15 दिन पहले छिंदवाड़ा, मऊगंज, सागर शहर और फिर झाबुआ जिला कांग्रेस की कार्यकारिणी घोषित की गई थी। अखिल भारतीय कांग्रेस ने जिला कार्यकारिणी के लिए 31 से लेकर 51 की संख्या निर्धारित की है लेकिन इन जिलों में संख्या अधिक हो गई। छिंदवाड़ा की कार्यकारिणी 250, सागर की 141 और मऊगंज में 59 की बनी। इस कारण अब प्रदेश कांग्रेस ने चारों जिला कार्यकारिणी पर रोक लगाते हुए नई कार्यकारिणी के लिए नाम मांग लिए हैं। इनकी घोषणा हुई थी तब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की इसको लेकर दिशा-निर्देश नहीं थे, लेकिन जंबो कार्यकारिणी को लेकर सवाल हमेशा उठते थे। इस बीच कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी राज्यों को परिपत्र भेजकर कहा कि जिला कार्यकारिणी 31 से लेकर 51 की होगी। यह फैसला अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के निर्देश के बाद लिया गया है। अब नई गाइडलाइन के अनुसार दोबारा कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा।
कितनी बड़ी होगी कार्यकारणी
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की ओर से प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) और जिला अध्यक्षों को भेजे गए पत्र में जिला कार्यकारिणी का नया स्वरूप तय किया गया है. निर्देश के अनुसार, बड़े जिलों में अधिकतम 51 और छोटे जिलों में 31 सदस्य ही कार्यकारिणी में शामिल किए जा सकेंगे. इससे अधिक सदस्यों को शामिल करने की अनुमति नहीं होगी. इसी मानक के आधार पर अब सभी जिलों में पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. दरअसल, जिला अध्यक्षों ने करीब तीन महीने की मशक्कत के बाद कार्यकारिणी की सूची तैयार कर पीसीसी को भेजी थी.
पीसीसी स्तर पर परीक्षण के बाद चार जिलों की कार्यकारिणी घोषित भी कर दी गई थी, जबकि शेष जिलों की घोषणा 15 फरवरी तक करने की तैयारी थी. इसी बीच केंद्रीय नेतृत्व का नया फरमान आ गया, जिससे पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ेगी या पड़ रही
अध्यक्षों के सामने नई चुनौती.?
नई मानक लागू होने के बाद जिला अध्यक्षों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पहले से घोषित या प्रस्तावित नामों में कटौती की है. जिन नेताओं के नाम कार्यकारिणी से हटाए जाएंगे, उनकी नाराजगी स्वाभाविक मानी जा रही है. वहीं, पीसीसी को भी सभी जिलों की संशोधित सूचियों का दोबारा परीक्षण करना होगा, जिसके बाद ही अंतिम घोषणा संभव होगी.
कमलनाथ के जिले में बनी जंबो कार्यकारिणी
प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. संजय कामले ने पुष्टि करते हुए कहा कि सभी जिलों की कार्यकारिणी नए सिरे से बनाई जाएगी. प्रयास है कि फरवरी माह के भीतर सभी जिलों की कार्यकारिणी घोषित कर दी जाए. वहीं छिंदवाड़ा जिले की कार्यकारिणी सबसे बड़ी थी, जिसमें कुल 261 सदस्य शामिल थे. इसमें 73 महामंत्री, 68 सचिव, 62 आमंत्रित सदस्य और अन्य पदाधिकारी थे. सूत्रों के अनुसार, इसी तरह की भारी-भरकम कार्यकारिणियों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने आकार सीमित करने का निर्णय लिया है, ताकि संगठन अधिक चुस्त-दुरुस्त और सक्रिय बने तथा पदाधिकारियों की जवाबदेही तय हो सके.
अब पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन में संतुलन और अनुशासन बनाए रखने के लिए तय मानकों के अनुसार ही नई कार्यकारिणी गठित की जाएगी।