इटारसी। पुराने बस स्टैंड पर बसों के ठहराव और यात्रियों के लिए पिक एंड ड्रॉप सुविधा की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन फिलहाल थम गया है। मंगलवार को दिनभर चली मान-मनौव्वल और दो दौर की हाईलेवल बैठकों के बाद प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच सहमति तो बन गई, लेकिन सवाल यह है कि क्या वास्तव में बस स्टैंड का विवाद सुलझ गया है? क्योंकि जल सत्याग्रह टलने के बावजूद पुराने बस स्टैंड पर पिक एंड ड्रॉप सुविधा को लेकर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
प्रशासन ने नवीन छत्रपति शिवाजी बस स्टैंड से ही बसों का संचालन सुनिश्चित करने का अपना रुख दोहराया है। वहीं यात्रियों की सुविधा के लिए ऑटो-ई-रिक्शा के किराये निर्धारित करने और सिटी बस जैसी परिवहन व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है। यानी फिलहाल आंदोलन को विराम मिला है, लेकिन जिस मूल मांग को लेकर विरोध शुरू हुआ था, उसका समाधान अभी बाकी है।
पहली बैठक में टकराव, ऑपरेटरों ने नहीं मानी शर्तें
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे एसडीएम कार्यालय में प्रशासन, बस ऑपरेटरों और कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के बीच पहली बैठक हुई। इसमें एसडीएम नीलेश शर्मा, एसडीओपी वीरेंद्र मिश्रा और थाना प्रभारी सौरभ पांडे मौजूद रहे।
बैठक में प्रशासन की ओर से बस संचालन को लेकर कुछ शर्तें रखी गईं, लेकिन बस ऑपरेटरों और कांग्रेस नेताओं ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। नतीजा यह रहा कि बातचीत बेनतीजा समाप्त हो गई।
कांग्रेस नेता रमेश साहू ने प्रशासन पर अपनी शर्तें थोपने का आरोप लगाते हुए कहा कि बातचीत में आंदोलनकारियों की मांगों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। बैठक विफल होने के बाद कांग्रेस नेता गज्जू तिवारी जल सत्याग्रह करने के लिए नर्मदापुरम रवाना हो गए।
कलेक्टर-एसपी ने संभाली कमान, ऐन वक्त पर टला सत्याग्रह
पहली बैठक विफल होने और जल सत्याग्रह की तैयारी के बाद मामला प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंचा। कलेक्टर कार्यालय नर्मदापुरम में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने आंदोलनकारी नेताओं के साथ दूसरी बैठक की।
इस बैठक में कलेक्टर ने पुराने बस स्टैंड के मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेने और यात्रियों तथा व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने का आश्वासन दिया। साथ ही सभी संबंधित पक्षों को बैठाकर स्थायी समाधान तलाशने की बात कही गई।
कलेक्टर के आश्वासन के बाद कांग्रेस नेता गज्जू तिवारी ने जल सत्याग्रह का निर्णय वापस ले लिया। इस तरह एक बड़े आंदोलन की तैयारी ऐन वक्त पर टल गई।
नवीन बस स्टैंड से ही चलेंगी बसें, प्रशासन अपने फैसले पर कायम
दूसरी ओर जिला प्रशासन ने बस संचालन को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। शहर की यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए नवीन छत्रपति शिवाजी बस स्टैंड से ही बसों का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।
करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से तवा कॉलोनी क्षेत्र में बनाए गए इस बस स्टैंड का उद्देश्य शहर के मुख्य मार्गों से बसों का दबाव कम करना और यात्रियों को एक व्यवस्थित परिवहन केंद्र उपलब्ध कराना है। हालांकि निर्माण के बाद भी यहां से बसों का नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका था।
अब प्रशासन ने बस ऑपरेटरों को नवीन बस स्टैंड से ही संचालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, व्यापारी संगठनों और बस ऑपरेटरों के सुझाव लेकर आगे की कार्ययोजना तैयार करने की बात कही गई है।
ऑटो-ई-रिक्शा का किराया तय होगा, सिटी बस पर भी विचार
नवीन बस स्टैंड शहर के मुख्य हिस्सों से दूर होने के कारण यात्रियों की आवाजाही एक बड़ी चुनौती है। इसी समस्या को देखते हुए बैठक में ऑटो और ई-रिक्शा के किराये निर्धारित करने तथा सिटी बस जैसी स्थानीय परिवहन सुविधा विकसित करने के सुझावों पर चर्चा हुई।
प्रशासन का प्रयास है कि बस स्टैंड तक पहुंचने और वहां से शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में जाने वाले यात्रियों को परेशानी न हो। मनमाना किराया वसूली रोकने के लिए किराया निर्धारण की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही गई है।
आगामी दिनों में संबंधित पक्षों के साथ एक और बैठक प्रस्तावित है। इसमें यात्री सुविधाओं, परिवहन संसाधनों और बस संचालन की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी।
सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम
पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल पुराने बस स्टैंड पर पिक एंड ड्रॉप सुविधा का है। व्यापारी और आंदोलनकारी इसी मांग को लेकर लामबंद हुए थे। जल सत्याग्रह की घोषणा भी इसी मुद्दे पर की गई थी।
फिलहाल प्रशासन ने नवीन बस स्टैंड से बस संचालन की व्यवस्था पर जोर दिया है, जबकि पुराने बस स्टैंड पर पिक एंड ड्रॉप सुविधा को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है।
ऐसे में जल सत्याग्रह का टलना आंदोलन का विराम जरूर है, लेकिन इसे विवाद का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। असली परीक्षा अब प्रशासन के उस आश्वासन की है, जिसमें सभी पक्षों को साथ बैठाकर यात्रियों और व्यापारियों के हित में अंतिम निर्णय लेने की बात कही गई है।