सभी का सवाल -नया बस स्टैंड चल सकता है तो पुराने पर पांच मिनट का ठहराव क्यों नहीं? गज्जू तिवारी की जल सत्याग्रह की चेतावनी,
इटारसी। स्टेशन रोड स्थित पुराने बस स्टैंड को दोबारा शुरू कराने की मांग अब केवल कुछ व्यापारियों या राजनीतिक कार्यकर्ताओं का आंदोलन नहीं रह गई है। इस मुद्दे पर व्यापारियों ने भी खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। संयुक्त व्यापार महासंघ ने मंगलवार, 3 नवंबर को इटारसी बाजार में सांकेतिक बंद का आह्वान किया है। दीपावली से ठीक पहले बाजार बंद रखने के इस फैसले को बस स्टैंड विवाद पर बढ़ते जनदबाव के रूप में देखा जा रहा है।
व्यापार महासंघ के आह्वान पर शहर के सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान दोपहर 1 बजे तक बंद रहेंगे। महासंघ अध्यक्ष दीपक हरिनारायण अग्रवाल ने व्यापारियों और नागरिकों से बंद को सफल बनाने की अपील की है। उनका कहना है कि स्टेशन रोड का बस स्टैंड शहर की पहचान होने के साथ शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के हजारों लोगों की महत्वपूर्ण आवागमन सुविधा भी रहा है। इसे दोबारा शुरू करना जनहित का विषय है।
दो बस स्टैंड चलाने की मांग पर अड़े व्यापारी
इस पूरे विवाद में व्यापारियों और आंदोलनकारियों का पक्ष स्पष्ट है। वे पुरानी इटारसी के बस स्टैंड को बंद कराने की मांग नहीं कर रहे, बल्कि चाहते हैं कि पुरानी इटारसी के साथ स्टेशन रोड स्थित पुराने बस स्टैंड पर भी बसों का संचालन और ठहराव शुरू किया जाए।
उनका तर्क है कि ग्रामीण क्षेत्रों से पढ़ाई, नौकरी, व्यापार, खरीदारी और इलाज के लिए इटारसी आने वाले लोगों को शहर के मुख्य बाजार और स्टेशन रोड तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। पुराने बस स्टैंड पर बसों का पांच मिनट का ठहराव भी हजारों यात्रियों के लिए राहत बन सकता है।
व्यापारियों का सवाल है कि शहर में नई परिवहन व्यवस्था बनाने का अर्थ पुरानी सुविधाओं को पूरी तरह समाप्त करना क्यों होना चाहिए? क्या दोनों बस स्टैंड के बीच समन्वय बनाकर यात्रियों और व्यापारियों की जरूरतों का समाधान नहीं निकाला जा सकता?
दो हजार हस्ताक्षर, अब बाजार बंद का फैसला
बस स्टैंड शुरू कराने की मांग को लेकर आंदोलन पहले ही कई चरणों से गुजर चुका है। कांग्रेस नेता गज्जू तिवारी जनसंवाद और रैली के माध्यम से अपनी बात रख चुके हैं। अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है।
वहीं व्यापारियों ने जयस्तंभ चौक पर हस्ताक्षर अभियान चलाया था। इसमें करीब दो हजार लोगों ने हस्ताक्षर कर पुराने बस स्टैंड को पुनः शुरू कराने की मांग का समर्थन किया।
अब व्यापार महासंघ ने सांकेतिक बंद का रास्ता चुना है। यह कदम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक व्यापारियों की सामूहिक नाराजगी पहुंचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
मांग नहीं मानी तो जल सत्याग्रह की चेतावनी
कांग्रेस नेता गज्जू तिवारी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि स्टेशन रोड स्थित बस स्टैंड को शुरू करने की मांग नहीं मानी गई तो वे जल सत्याग्रह करेंगे। बताया गया है कि बस संचालकों ने भी इस आंदोलन को समर्थन देने की सहमति जताई है।
इस चेतावनी के बाद आंदोलन का अगला चरण क्या होगा, इस पर भी नजरें टिकी हैं। फिलहाल मंगलवार का सांकेतिक बंद इस विवाद में व्यापारियों की भागीदारी और आंदोलन की व्यापकता का महत्वपूर्ण संकेत होगा।
राजेंद्र सिंह तोमर की भावुक अपील—यह लड़ाई बस स्टैंड की नहीं, आम आदमी की है
हॉकी नर्मदापुरम (मान्यता प्राप्त) के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह तोमर ने भी बाजार बंद को समर्थन देने की अपील की है। उन्होंने आम नागरिकों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों से इस मुद्दे पर विचार करने का आग्रह किया।
तोमर ने अपनी अपील में गरीब मजदूर, गांव से सब्जियां लेकर आने वाले किसान, बस से पढ़ने आने वाली छात्राओं और इलाज के लिए शहर पहुंचने वाले बुजुर्गों की परेशानियों का उल्लेख किया।
उनका कहना है कि किसी के लिए पांच मिनट का बस स्टॉपेज मामूली बात हो सकती है, लेकिन किसी गरीब यात्री के लिए यही पांच मिनट समय, पैसा और परेशानी बचाने का जरिया हैं। बुजुर्गों के लिए यह पैदल चलने की तकलीफ कम करने वाली सुविधा है तो छात्राओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन का सवाल।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाने तथा यात्रियों की परेशानी को समझते हुए सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
जनप्रतिनिधियों के सामने सीधा सवाल
इस विवाद में आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे नए बस स्टैंड के विरोधी नहीं हैं। उनकी मांग है कि नया बस स्टैंड भी संचालित रहे और स्टेशन रोड स्थित पुराने बस स्टैंड पर भी बसों को कम से कम पांच मिनट का ठहराव मिले।
अब सवाल यह है कि क्या शहर की परिवहन व्यवस्था में दोनों क्षेत्रों की जरूरतों को समायोजित करने का कोई व्यावहारिक रास्ता निकाला जा सकता है? क्या बसों के ठहराव, यातायात प्रबंधन और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर कोई बीच का रास्ता संभव नहीं है?
फिलहाल व्यापारी बाजार बंद करने जा रहे हैं, आंदोलनकारी जल सत्याग्रह की चेतावनी दे चुके हैं और करीब दो हजार हस्ताक्षरों के जरिए अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाई जा चुकी है।
3 नवंबर का सांकेतिक बंद अब केवल व्यापारिक गतिविधियां रोकने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पुराने बस स्टैंड के भविष्य पर शहर की नाराजगी और जनसुविधा के सवाल को सामने लाने की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक-सामाजिक गतिविधि बन गया है।