इटारसी। शहर में लगातार बढ़ रही चाकूबाजी और अपराध की घटनाओं के बाद आखिरकार पुलिस ने अब अपराधियों की पुरानी फाइलें खोलनी शुरू कर दी हैं। पिछले दो वर्षों में चाकूबाजी की घटनाओं में सामने आए आरोपियों से लेकर नामचीन गुंडों और आदतन बदमाशों तक का नया डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। खबरों के अनुसार पुलिस ने  करीब 100 चाकूबाजों को चिन्हित किया गया है, जबकि करीब 200 बदमाशों को निगरानी सूची में शामिल किया गया है।
खास बात यह है कि पुलिस की कार्रवाई का बड़ा फोकस 18 से 30 वर्ष के युवाओं पर है। अब तक 40 से 50 से अधिक युवाओं और चाकूबाजी में लिप्त रहे आरोपियों के डोजियर फॉर्म भरवाए जा चुके हैं। पुलिस रोज करीब 10 नए और कम उम्र के अपराधियों को थाने बुलाकर उनकी जानकारी जुटा रही है। उनके घरों पर जाकर भी निगरानी और चेकिंग की जा रही है।
तीन महीने में एक दर्जन से ज्यादा वारदात, दो की मौत के बाद तेज हुई कार्रवाई
शहर में पिछले तीन महीनों में चाकूबाजी की एक दर्जन से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें दो लोगों की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए। 29 सितंबर को स्टेशन रोड पर थाने से महज करीब 300 मीटर दूर दिनदहाड़े युवक की चाकू मारकर हत्या के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। इसके बाद पुलिस ने सक्रिय अपराधियों और पुराने रिकॉर्ड वाले बदमाशों पर निगरानी बढ़ाने की कवायद तेज कर दी।अब पुलिस का दावा है कि अपराधियों की पहचान केवल नाम और पुराने केस तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनकी व्यक्तिगत, पारिवारिक और आपराधिक पृष्ठभूमि का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
डोजियर में सिर्फ अपराध नहीं, परिवार और संपत्ति की भी जानकारी
पुलिस के डोजियर में बदमाश का नाम, पहचान चिह्न, वर्तमान और पुराने पते के साथ उसके आपराधिक रिकॉर्ड का विवरण दर्ज किया जा रहा है। इसमें पूर्व घटनाओं, दर्ज धाराओं, घटना की तारीख और घटनास्थल की जानकारी के अलावा परिवार के सदस्यों, आय के साधन, आजीविका और संपत्ति से संबंधित जानकारी भी जुटाई जा रही है।
यानी पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कौन बदमाश है, उसका नेटवर्क क्या है और उसकी गतिविधियों पर किस तरह नजर रखी जा सकती है।
तीन केस वालों पर धारा 110, एक-दो केस वालों पर 116 की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार जिन बदमाशों के खिलाफ तीन या उससे अधिक आपराधिक रिकॉर्ड हैं, उनके खिलाफ धारा 110 के तहत कार्रवाई की जा रही है। वहीं एक या दो अपराध वाले बदमाशों पर धारा 116 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा रही है।
इसके अलावा करीब 20 बदमाशों को जिला बदर करने के प्रस्ताव कलेक्टर के समक्ष भेजे गए हैं। इन प्रस्तावों पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई होना बाकी है।
200 बदमाश निगरानी में, लेकिन सूची से नाम भी हटेंगे
पुलिस ने इस वर्ष तीन या उससे अधिक अपराध वाले करीब 200 लोगों को गुंडा सूची में शामिल किया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि निगरानी सूची स्थायी नहीं होगी। जिन लोगों ने पिछले दो या उससे अधिक वर्षों में कोई अपराध नहीं किया है या जिनकी उम्र काफी बढ़ चुकी है, उनके नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया भी की जा रही है।
यह पहल इस मायने में महत्वपूर्ण है कि पुलिस केवल नए नाम जोड़ने के बजाय पुराने बदमाशों की गतिविधियों की समीक्षा भी कर रही है।
रात में फिक्स पॉइंट, मोबाइल पेट्रोलिंग और मोहल्लों में चेकिंग
अपराध नियंत्रण के लिए संवेदनशील इलाकों में रात की गश्त बढ़ाई गई है। पुलिस के अनुसार जुझारपुर रोड, यार्ड और मेहरा गांव क्षेत्र में शाम से रात तक गश्त की जा रही है। भीड़भाड़ और संदिग्ध गतिविधियों वाले स्थानों पर फिक्स पॉइंट लगाए जा रहे हैं।
बस स्टैंड और घाट मोहल्ला क्षेत्र में रात के समय मोबाइल पेट्रोलिंग और चेकिंग की जा रही है। बीट प्रभारी भी शाम के समय निगरानी सूची में शामिल बदमाशों की गतिविधियों की जांच कर रहे हैं।
सवाल यह कि पहले क्यों नहीं बनी बदमाशों की ऐसी कुंडली?
पुलिस की मौजूदा कार्रवाई से अपराधियों पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन लगातार चाकूबाजी की घटनाओं के बाद शुरू हुए इस अभियान ने एक सवाल भी खड़ा किया है—क्या अपराधियों का ऐसा डाटाबेस और नियमित निगरानी पहले से नहीं होनी चाहिए थी?
शहर में चाकूबाजी की घटनाएं लगातार सामने आने के बाद अब पुलिस दो साल पुराने रिकॉर्ड को खंगाल रही है। यदि यह व्यवस्था पहले से सक्रिय होती और सूचीबद्ध बदमाशों की नियमित निगरानी होती, तो क्या कुछ वारदातें रोकी जा सकती थीं—यह सवाल अब पुलिस की नई रणनीति के साथ जुड़ गया है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि डोजियर, निगरानी, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, जिला बदर प्रस्ताव और रात की गश्त के जरिए अपराधियों पर शिकंजा कसने की कार्रवाई जारी है।
मीडिया मे छपी खबरों के मुताबिक टीआई सौरभ पांडे का कहना है कि , चाकूबाजी की घटनाओं में शामिल लोगों की सूची तैयार की जा रही है और डोजियर फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि अपराध नियंत्रण के लिए सूचीबद्ध बदमाशों पर लगातार नजर रखी जाएगी।