इटारसी। रामलीला उत्सव के दौरान गांधी स्टेडियम, रामलीला मैदान और पुरानी इटारसी के वीर सावरकर स्टेडियम में अस्थायी दुकानों के आवंटन को लेकर नगर पालिका विवादों में घिर गई है। दुकान आवंटन और कथित भारी-भरकम शुल्क के विरोध में वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद पगारे बुधवार को जयस्तंभ चौक पर धरने पर बैठ गए। पगारे ने आरोप लगाया कि नगर पालिका सीएमओ ने परिषद की सामान्य सभा और प्रेसिडेंट काउंसिल की अनुमति के बिना छोटे दुकानदारों को अस्थायी दुकानें आवंटित करने का निर्णय लिया है।
पगारे ने सवाल उठाया कि फुग्गा, मूंगफली, फुल्की या खिलौने बेचकर रोजी-रोटी चलाने वाला छोटा दुकानदार इतना शुल्क आखिर कैसे देगा? उनका कहना है कि जिन दुकानदारों की दिनभर की कमाई ही सीमित है, उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उनके रोजगार पर सीधा असर डालेगा।
'छोटे दुकानदारों की लूट बंद हो'
धरने के दौरान पगारे ने कहा कि नगर पालिका द्वारा पहले ही स्थायी दुकानदारों के किराए में वृद्धि की जा चुकी है। अब रामलीला उत्सव के दौरान छोटे दुकानदारों पर भी भारी शुल्क का बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने दुकान आवंटन संबंधी निर्णय तत्काल वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं से लेकर भाजपा नेता तक समर्थन में
पगारे के धरने को कांग्रेस नेताओं, पत्रकारों, व्यापारियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का समर्थन मिला। धरना स्थल पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवाकांत पाण्डेय, नगर अध्यक्ष कन्हैया गोस्वामी, आप नेता श्री गुप्ता, पूर्व पार्षद महेश आर्य, वरिष्ठ पत्रकार सुधांशु मिश्र, साहित्यकार विनोद कुशवाह, एडवोकेट संतोष गुरयानी, पत्रकार रोहित नागे और भूपेंद्र विश्वकर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
सभी ने छोटे दुकानदारों पर आर्थिक बोझ कम करने और दुकान आवंटन के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की।
राजस्व समिति सभापति बोलीं- परिषद को विश्वास में लेकर हो आदेश
वार्ड 13 की पार्षद एवं राजस्व समिति की सभापति अमृता मनीष ठाकुर ने भी पगारे की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि दुकान आवंटन संबंधी आदेश और विज्ञापन जारी करने से पहले परिषद को विश्वास में लिया जाना चाहिए। रामलीला के दौरान छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता रमेश साहू ने भी पगारे की मांग का समर्थन किया है।
भाजपा नेता लालू गौर बोले- मांग जायज, लेकिन मुद्दे और भी हैं
पूर्व पार्षद और भाजपा नेता लालू गौर ने सोशल मीडिया पर पगारे के धरने का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी मांग जायज है और उन्हें अच्छा समर्थन भी मिल रहा है। गौर ने सवाल उठाया कि रामलीला के दौरान वैसे भी एक-दो दिन ही ज्यादा चहल-पहल रहती है और यदि दशहरे के दिन ही दुकानें हटवा दी जाएंगी तो छोटे दुकानदार क्या करेंगे?
हालांकि गौर ने इसी के साथ नगर पालिका से जुड़े एक बड़े मुद्दे की ओर भी ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि यदि पगारे जैसे व्यक्ति छोटी बात भी उठाते हैं तो आदेश रद्द हो जाता है, लेकिन आंदोलन करना ही है तो नगर पालिका द्वारा बढ़ाए गए संपत्ति कर और दुकान किराए जैसे बड़े मुद्दे भी उठाए जाने चाहिए।
अब सवाल सिर्फ दुकानों का नहीं
रामलीला मैदान में अस्थायी दुकानों का आवंटन अब केवल शुल्क का मामला नहीं रह गया है। मामला नगर पालिका के निर्णय लेने की प्रक्रिया, परिषद की भूमिका और छोटे दुकानदारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ तक पहुंच गया है। एक तरफ दुकानदार शुल्क कम करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब देखना यह है कि नगर पालिका इस विरोध के बाद दुकान आवंटन के निर्णय पर पुनर्विचार करती है या धरना आंदोलन का रूप लेता है।
रामलीला मैदान की दुकानें बनीं विवाद का अखाड़ा, किराया वसूली के विरोध में धरने पर बैठे वरिष्ठ पत्रकार पगारे
परिषद की मंजूरी के बिना आवंटन का आरोप, कांग्रेस से लेकर भाजपा नेताओं तक ने किया समर्थन
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