इटारसी।नर्मदापुरम//
नर्मदापुरम जिले में चाकूबाजी की लगातार हो रही घटनाओं ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इटारसी में मंगलवार सुबह थाने से महज 300 कदम दूर स्टेशन रोड जैसे व्यस्त इलाके में दो आरोपियों ने अपने ही दोस्त विक्रम मेहरा की चाकू मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस घटना ने शहर में अपराधियों के बेखौफ होने की तस्वीर फिर सामने ला दी है।
गुरुद्वारे के पास हुई हत्या की वजह को लेकर भी पुलिस और सीसीटीवी फुटेज के बीच अंतर नजर आ रहा है। पुलिस के अनुसार शराब पीने के लिए 100 रुपए मांगने पर विवाद हुआ, जबकि सीसीटीवी में मोबाइल मांगने को लेकर विवाद और उसके बाद चाकू मारने की घटना सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी पहले से कई मामलों में दर्ज हैं।
छोटे विवाद से चाकू और हत्या तक
इटारसी में पिछले तीन महीनों में चाकूबाजी की करीब एक दर्जन से अधिक घटनाएं सामने आने का दावा है। इनमें दो लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं। घटनाओं में शराब के लिए पैसे मांगने, अड़ीबाजी, पुरानी रंजिश, वर्चस्व की लड़ाई और छोटे विवादों का हिंसक रूप लेना सामने आया है। नाबालिगों के चाकूबाजी में शामिल होने की घटनाएं भी चिंता बढ़ा रही हैं।
शुक्रवार रात डिप्टी रेंजर से पांच हजार रुपए की अड़ीबाजी के मामले में भी आरोपी ने अपने ही साथी की जांघ पर चाकू मार दिया। पुलिस के अनुसार घटना में दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
इटारसी से सिवनी मालवा और पिपरिया तक वारदातें
चाकूबाजी का सिलसिला केवल इटारसी तक सीमित नहीं है। सिवनी मालवा में सार्वजनिक स्थान पर तलवार लहराने के मामले में युवक की गिरफ्तारी हुई। पिपरिया में भी चाकूबाजी और धारदार हथियारों से जुड़े गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। इससे जिले के अलग-अलग शहरों में हथियारों के खुले इस्तेमाल और अपराधियों के दुस्साहस को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आरोपी पकड़े जा रहे, लेकिन वारदातें क्यों नहीं रुक रहीं?
पुलिस का कहना है कि चाकूबाजी की अधिकांश घटनाओं में आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इसके बावजूद घटनाओं की पुनरावृत्ति पुलिस की अपराध नियंत्रण रणनीति पर सवाल खड़े करती है। खासकर तब, जब कई वारदातों में पहले से आपराधिक रिकॉर्ड वाले आरोपी सामने आ रहे हैं।
इटारसी पुलिस ने करीब 20 अपराधी तत्वों के खिलाफ जिलाबदर का प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी दी है, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई नहीं हो सकी है। यही देरी अपराध नियंत्रण की प्रभावशीलता को लेकर सवाल पैदा करती है।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि आरोपी कितनी जल्दी पकड़े गए। बड़ा सवाल यह है कि अपराधी वारदात करने से पहले पुलिस से डर क्यों नहीं रहे?
Continue With Google
Comments (0)