इटारसी। जिलवानी (कीरतपुर) स्थित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन डंपिंग यार्ड में कथित कुप्रबंधन और पर्यावरणीय लापरवाही का मामला अब राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) पहुंच गया है। आरटीआई एक्टिविस्ट अमोल उपाध्याय की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की सेंट्रल बेंच भोपाल ने 30 सितंबर 2026 को सभी प्रतिवादियों को तत्काल नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने कलेक्टर प्रतिनिधि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रतिनिधि और नगर पालिका सीएमओ प्रतिनिधि की कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। कमेटी को मामले में आवश्यक कार्रवाई करते हुए छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
चार सप्ताह में जवाब, छह सप्ताह में रिपोर्ट
एनजीटी ने सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कमेटी को डंपिंग यार्ड से जुड़े पर्यावरणीय और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
आवेदन पर सुनवाई के दौरान अमोल उपाध्याय के अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने मूल आवेदन के साथ दस्तावेज और तर्क प्रस्तुत किए। आवेदन में जिलवानी डंपिंग यार्ड में कथित अनियमितताओं, कचरा प्रबंधन की स्थिति और इससे मानव, पशु तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का मुद्दा उठाया गया है।
नगरपालिका को नियमों के पालन के निर्देश
आदेश में एनजीटी ने नगर पालिका इटारसी को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन और लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
एनजीटी ने आवेदक को प्रतिवादियों पर नोटिस की तामीली के लिए ई-मेल माध्यम का उपयोग करने की अनुमति भी आदेश में शामिल की है।
₹1.72 करोड़ के भुगतान पर भी उठे थे सवाल
इस मामले की पृष्ठभूमि में मई 2026 में अमोल उपाध्याय द्वारा की गई एक सार्वजनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी महत्वपूर्ण है। इसमें उन्होंने जिलवानी कचरा डंपिंग यार्ड में कथित कुप्रबंधन के साथ करीब ₹1 करोड़ 72 लाख 90 हजार रुपये की राशि के भुगतान को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।
उपाध्याय ने आरोप लगाया था कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिम्मेदार कंपनी एसआर मैप, ग्वालियर को बिना अपेक्षित कार्य किए भुगतान किया गया। उन्होंने स्थानीय निकाय के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। इन आरोपों से संबंधित शिकायतें कलेक्टर की जनसुनवाई सहित विभिन्न उच्च विभागों में प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई थी।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। एनजीटी द्वारा गठित कमेटी की जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही मामले के तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।
अब 10 दिसंबर को अगली सुनवाई
एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 दिसंबर 2026 की तारीख तय की है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जांच कमेटी जिलवानी डंपिंग यार्ड की स्थिति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था और लगाए गए आरोपों पर अपनी रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने रखती है।
इटारसी के कचरा डंप यार्ड पर एनजीटी की सख्ती, सभी प्रतिवादियों को नोटिस; 6 हफ्ते में जांच रिपोर्ट तलब
जिलवानी डंपिंग यार्ड के कुप्रबंधन पर एनजीटी में पहुंचा मामला, कलेक्टर-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नपा प्रतिनिधि की कमेटी करेगी जांच
Continue With Google
Comments (0)