भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच संगठन को मजबूत करने के लिए अब अपने पुराने राजनीतिक चेहरों पर फोकस किया है। पार्टी ने पूर्व विधायकों को फिर से सक्रिय करने की रणनीति बनाई है और इसकी कमान प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल को सौंपी गई है। शुक्रवार को उन्होंने इस जिम्मेदारी का विधिवत कामकाज संभाल लिया।
मानक अग्रवाल की भूमिका महज पूर्व विधायकों से संपर्क और संवाद तक सीमित नहीं रहेगी। वे प्रदेशभर के पूर्व विधायकों से सीधे संवाद कर उनकी राजनीतिक सक्रियता, क्षेत्र में पकड़, कार्यकर्ताओं के साथ संबंध और संगठन में उपयोगिता का फीडबैक जुटाएंगे। इसके आधार पर पार्टी नेतृत्व को यह भी सुझाएंगे कि किस पूर्व विधायक की क्षमता का इस्तेमाल किस स्तर पर और किस भूमिका में किया जा सकता है।
कौन कितना उपयोगी, तय करेंगे अग्रवाल
कांग्रेस नेतृत्व ने यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मानक अग्रवाल को दी है, जब पार्टी अगले साल से शुरू होने वाले चुनावी दौर के लिए संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने में जुटी है। ऐसे में पूर्व विधायकों को साधना पार्टी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
पूर्व विधायक अपने क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरण, स्थानीय कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की नब्ज से परिचित हैं। लेकिन चुनावी राजनीति में उनकी वर्तमान सक्रियता और स्वीकार्यता अलग-अलग है। ऐसे में कौन नेता अभी भी जमीन पर प्रभावी है और किसे संगठन की जिम्मेदारी देकर राजनीतिक फायदा उठाया जा सकता है, इसका आकलन मानक अग्रवाल के फीडबैक से महत्वपूर्ण रूप से जुड़ा रहेगा।
नाराजगी और अपेक्षाओं का भी लेंगे हिसाब
मानक अग्रवाल पूर्व विधायकों की राजनीतिक अपेक्षाओं और संगठन को लेकर उनकी नाराजगी या असंतोष को भी समझेंगे। लंबे समय से सक्रिय राजनीति में रहने वाले कई पूर्व विधायक संगठन में उचित भूमिका नहीं मिलने की स्थिति में निष्क्रिय हो गए हैं। पार्टी अब ऐसे नेताओं को दोबारा मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही है।
अग्रवाल इन नेताओं से संवाद कर उनकी अपेक्षाओं को प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाएंगे। जरूरत के मुताबिक उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियां, चुनावी दायित्व या क्षेत्र विशेष में महत्वपूर्ण भूमिकाएं देने की सिफारिश भी की जा सकती है।
चुनावी रणनीति में अहम कड़ी
कांग्रेस प्रदेश में आदिवासी, महिला और पिछड़ा वर्ग को लेकर समितियों का गठन कर चुकी है। छात्र संघ चुनाव के लिए जिला प्रभारियों की नियुक्ति के बाद अब पूर्व विधायकों को सक्रिय करने की कवायद शुरू हुई है। इन सभी प्रयासों के बीच मानक अग्रवाल को दी गई जिम्मेदारी को पार्टी की जमीनी चुनावी रणनीति की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
आने वाले दिनों में पूर्व विधायकों के साथ होने वाले संवाद और उससे मिलने वाले फीडबैक के आधार पर पार्टी संगठन में कई नेताओं की भूमिका तय कर सकती है। इस लिहाज से मानक अग्रवाल के हाथ में केवल समन्वय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पार्टी के पुराने राजनीतिक नेटवर्क को चुनावी ताकत में बदलने का अहम दायित्व है।