2027 के नगरीय निकाय चुनाव से पहले वार्डों के पुनर्गठन की तैयारी; कहीं 1,053 मतदाता तो कहीं 3,494, जनसंख्या और मतदाता संख्या के पुराने आंकड़े भी सवालों के घेरे में
इटारसी//
 अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले इटारसी नगरपालिका के वार्डों का चुनावी गणित बदलने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। वार्डों के परिसीमन यानी सीमाओं के पुनर्निर्धारण की कवायद के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शहर के सभी वार्डों में मतदाताओं की संख्या और भौगोलिक क्षेत्र का संतुलन बनाया जाएगा? यदि वार्डों की सीमाएं बदलीं तो कई पार्षदों का परंपरागत चुनावी क्षेत्र भी बदल सकता है। इतना ही नहीं, परिसीमन के बाद आरक्षण की प्रक्रिया में बदलाव हुआ तो कुछ जनप्रतिनिधियों को अपनी अगली चुनावी पारी के लिए नया वार्ड भी तलाशना पड़ सकता है।
प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नगरीय निकायों की सीमावृद्धि, वार्डों के पुनर्गठन और परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव 31 अक्टूबर 2026 तक भेजने के निर्देश दिए हैं। इटारसी नगरपालिका में भी इस संबंध में प्रक्रिया शुरू हुई है। हालांकि, फिलहाल नगरपालिका की सीमा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। वार्डों का परिसीमन आवश्यक है या नहीं, इस पर नगरपालिका परिषद की बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
कहीं 1,053 मतदाता, कहीं 3,494; एक जैसे वार्डों का गणित कहां?
इटारसी के 34 वार्डों में मतदाताओं की संख्या का अंतर परिसीमन की जरूरत पर सवाल खड़े करता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वार्ड क्रमांक 14 में 1,053 और वार्ड क्रमांक 8 में 1,070 मतदाता हैं। वार्ड क्रमांक 32 में यह संख्या 1,170 है। दूसरी ओर, वार्ड क्रमांक 2 में 3,494 और वार्ड क्रमांक 21 में 3,439 मतदाता बताए गए हैं।
यानी सबसे अधिक और सबसे कम मतदाताओं वाले वार्डों के बीच तीन गुने से भी अधिक का अंतर है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या सभी वार्डों के जनप्रतिनिधियों को लगभग समान मतदाता संख्या और संतुलित भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर जिम्मेदारी मिलनी चाहिए?
बड़े वार्डों में पार्षदों को अधिक क्षेत्र में जनसंपर्क करना पड़ता है। प्रत्येक मोहल्ले तक पहुंचना, नागरिकों की समस्याएं सुनना और विकास कार्यों की निगरानी करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। दूसरी ओर, छोटे वार्डों में मतदाताओं और भौगोलिक क्षेत्र का दायरा अपेक्षाकृत कम रहता है। परिसीमन की कवायद का एक महत्वपूर्ण पहलू इस असंतुलन को दूर करना हो सकता है।
जनसंख्या कुछ और, मतदाता संख्या कुछ और; पुराने आंकड़ों पर भी सवाल
इटारसी में परिसीमन का मुद्दा केवल मतदाताओं की संख्या तक सीमित नहीं है। वार्डों की जनसंख्या और मतदाता सूची के आंकड़ों के बीच भी बड़ा अंतर सामने आने का दावा किया गया है।
उपलब्ध पुराने आंकड़ों के अनुसार, वार्ड क्रमांक 14 की जनसंख्या 2,985 बताई गई थी, जबकि वर्ष 2014 में यहां 962 मतदाता दर्ज थे। वार्ड क्रमांक 17 की जनसंख्या 3,139 के मुकाबले मतदाताओं की संख्या 1,623 बताई गई थी। इसी तरह वार्ड क्रमांक 18 की जनसंख्या तीन हजार से अधिक थी, जबकि मतदाता 1,287 बताए गए थे।
ये आंकड़े पुराने हैं। इसलिए मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए अद्यतन मतदाता सूची और नवीनतम उपलब्ध जनसंख्या संबंधी आंकड़ों का मिलान जरूरी है। इसके बावजूद ये आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि वार्डों की सीमाओं, जनसंख्या और मतदाता संख्या का नए सिरे से परीक्षण महत्वपूर्ण हो सकता है।
वार्डों की जनसंख्या के साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी से जुड़े आंकड़ों की शुद्धता भी अहम है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में इस संबंध में शिकायत की गई थी और उसके बाद आंशिक सुधार हुआ था। यदि परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो आंकड़ों की विश्वसनीयता और उनका अद्यतन होना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
परिसीमन के बाद आरक्षण का गणित भी बदल सकता है
वार्डों का पुनर्गठन केवल सीमाओं में बदलाव नहीं होगा। इसका असर आरक्षण और चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर भी पड़ सकता है। पूर्व वरिष्ठ पार्षद एवं अधिवक्ता यज्ञदत्त गौर के अनुसार, वार्डों के पुनर्गठन के बाद नियमानुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण की प्रक्रिया नए सिरे से करनी पड़ सकती है।
यदि ऐसा होता है तो वर्तमान में किसी सामान्य सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नेता का वार्ड आरक्षित हो सकता है। वहीं, वार्ड की सीमा बदलने से किसी पार्षद का परंपरागत जनाधार दूसरे वार्ड में जा सकता है। ऐसी स्थिति में नेताओं को नए सिरे से अपनी चुनावी रणनीति बनानी पड़ेगी।
हालांकि, परिसीमन और आरक्षण में वास्तविक बदलाव किस रूप में होगा, यह संबंधित नियमों, स्वीकृत प्रस्तावों और शासन की आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
भाजपा-कांग्रेस के चुनावी समीकरण पर भी पड़ेगा असर?
इटारसी में वार्डों की सीमाओं का पुनर्गठन हुआ तो उसका प्रभाव केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा। बाजार क्षेत्र में भाजपा का मजबूत जनाधार माना जाता है, जबकि पुरानी इटारसी, नाला मोहल्ला, गरीबी लाइन और पीपल मोहल्ला जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस का भी प्रभाव रहा है।
यदि वार्डों की सीमाओं में बदलाव के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों के मतदाता नए वार्डों में शामिल होते हैं तो किसी वार्ड का मौजूदा राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। इसका फायदा किस दल या उम्मीदवार को होगा, यह नए सीमांकन, मतदाताओं के स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा।
यही कारण है कि परिसीमन की प्रशासनिक कवायद पर राजनीतिक नजरें भी टिकी रहेंगी। मौजूदा पार्षदों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि जिस वार्ड में उन्होंने अब तक राजनीतिक आधार बनाया है, उसकी सीमाएं आगे भी वैसी ही रहेंगी या उन्हें नए क्षेत्र में अपनी पकड़ बनानी पड़ेगी।
सीमा विस्तार नहीं, फिलहाल वार्डों के पुनर्गठन पर नजर
इटारसी नगरपालिका की सीमा बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। ऐसे में निकट भविष्य में चर्चा का प्रमुख विषय मौजूदा 34 वार्डों की सीमाओं और उनके पुनर्गठन की जरूरत हो सकता है।
नगरपालिका परिषद की बैठक में इस विषय पर निर्णय लिया जाना है। शासन को प्रस्ताव भेजने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद प्रस्तावों पर होने वाली कार्रवाई से परिसीमन की दिशा स्पष्ट होगी।
सीमा वृद्धि भी जनहित में जरूरी : रमेश के साहू
काँग्रेसनेता एवं एडवोकेट रमेश के साहू ने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव से पहले नगरपालिका परिषद का विशेष सम्मेलन बुलाकर वार्डों के परिसीमन और भौगोलिक स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने इटारसी नगरपालिका की सीमा वृद्धि को जनहित में जरूरी बताते हुए शासन को प्रस्ताव भेजने की मांग की।
साहू ने कहा कि परिसीमन में मतदाताओं की संख्या का तार्किक संतुलन बनाने के साथ जातिगत जनसंख्या के आंकड़ों की विसंगतियां भी दूर की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में राजनीतिक लाभ के लिए अधिकारियों के सहयोग से वार्डों का वर्गीकरण रातोंरात बदल दिया गया था, जिससे कुछ वार्डों में मतदाताओं की संख्या बहुत कम और कुछ में बहुत अधिक हो गई। उन्होंने कहा कि परिसीमन में राजनीतिक समीकरणों के बजाय भौगोलिक स्थिति और समान जनसंख्या के प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

सीएमओ बोलीं—परिषद की बैठक में रखेंगे प्रस्ताव
नगरपालिका इटारसी की सीएमओ सुरेखा जाटव के अनुसार, वार्डों के परिसीमन के संबंध में पत्र जारी किया गया है। परिसीमन का प्रस्ताव नगरपालिका परिषद की बैठक में रखा जाएगा। सीमा विस्तार के संबंध में भी बैठक में ही चर्चा की जाएगी।
अब इन सवालों पर रहेगी नजर
क्या इटारसी के सभी 34 वार्डों का परिसीमन किया जाएगा?
क्या मतदाताओं की संख्या और वार्डों के भौगोलिक क्षेत्र में संतुलन बनाया जाएगा?
क्या जनसंख्या और मतदाता सूची के आंकड़ों की विसंगतियों को दूर किया जाएगा?
परिसीमन के बाद आरक्षण की स्थिति में क्या बदलाव होंगे?
क्या वर्तमान पार्षदों को अपने परंपरागत वार्डों से बाहर नए राजनीतिक समीकरण तलाशने पड़ेंगे?
फिलहाल परिसीमन की जरूरत पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। लेकिन यदि वार्डों का पुनर्गठन हुआ तो इटारसी में 2027 के नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी केवल उम्मीदवारों के चयन तक सीमित नहीं रहेगी। कई नेताओं को अपना चुनावी क्षेत्र, जनसंपर्क और राजनीतिक रणनीति भी नए सिरे से तय करनी पड़ सकती है।