भोपाल।भाजपा खुद को अनुशासित संगठन कहती है, लेकिन मध्यप्रदेश में संगठन के भीतर चल रही खींचतान अब इतनी चर्चा में है कि उसे खत्म करने की जिम्मेदारी बाकायदा जिलाध्यक्षों और प्रभारियों को सौंपनी पड़ रही है। प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देव ने संभागीय और जिला प्रभारियों से संवाद में साफ कहा कि किसी भी स्तर पर गुटबाजी बर्दाश्त नहीं होगी और अगले तीन महीने में मतभेद दूर करने होंगे।
यानी संगठन में ‘सब ठीक है’ वाली तस्वीर के पीछे अगर कुछ ठीक नहीं है, तो अब उसकी रिपोर्ट भी बनेगी और दिल्ली तक जाएगी। संगठन के कामकाज की मासिक रिपोर्ट दिल्ली भेजे जाने की बात ने इस पूरी कवायद को और महत्वपूर्ण बना दिया है।


तीन महीने में गुटबाजी खत्म करने का टारगेट
देव ने कहा कि जहां भी नेताओं के बीच नाराजगी या आपसी खींचतान है, उसे बातचीत के जरिए दूर किया जाए। संभाग और जिला प्रभारी जिलाध्यक्षों के साथ बैठकर विवाद सुलझाएं। बात नहीं बने तो संबंधित लोगों के नाम प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व तक भेजे जाएं।
सियासी तौर पर देखें तो संदेश साफ है—अब संगठन में गुट किसका है, यह महत्वपूर्ण नहीं; गुटबाजी खत्म हुई या नहीं, इसकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।


जेसीबी से फूल बरसाने पर भी ‘ब्रेक’
प्रदेश प्रभारी ने नेताओं के स्वागत में जेसीबी से फूल बरसाने और बड़ी-बड़ी मालाओं की बढ़ती परंपरा पर भी सवाल उठाया। उन्होंने सादगी से खुशी जताने की नसीहत दी।
पोस्टर-बैनर को लेकर भी संदेश दिया गया कि उनका इस्तेमाल सरकार की योजनाओं और कामकाज को जनता तक पहुंचाने के लिए हो, न कि नेताओं के व्यक्तिगत प्रचार या ताकत दिखाने के लिए।
यानी संगठन को शायद यह समझाना पड़ रहा है कि फूल कम बरसाइए, काम ज्यादा दिखाईए।


पोस्टर पर चेहरा नहीं, योजनाओं का चेहरा दिखे
देव की इस नसीहत का राजनीतिक अर्थ भी निकाला जा रहा है। संगठन में पद और प्रभाव को लेकर चलने वाली ‘दिखाऊ राजनीति’ पर लगाम लगाने का संकेत माना जा रहा है।
कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से यह भी कहा गया कि सिर्फ संगठन की बैठकें और कार्यक्रम पर्याप्त नहीं हैं। यह देखना भी उनकी जिम्मेदारी है कि सरकार की योजनाओं का लाभ वास्तव में जनता तक पहुंच रहा है या नहीं।


भोपाल से बाहर निकलेंगे प्रदेश प्रभारी
देव ने संकेत दिया कि संगठन की वास्तविक स्थिति समझने के लिए वे केवल भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय तक सीमित नहीं रहेंगे। जिलों, गांवों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे।
यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कागजों पर मजबूत संगठन और जमीन पर सक्रिय संगठन के बीच का अंतर अक्सर बैठकों में नहीं, बल्कि बूथ पर दिखाई देता है।


कोर ग्रुप में भी बदलाव के संकेत
प्रदेश कोर ग्रुप के विस्तार की बात भी सामने आई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अगली बैठक से पहले इसमें व्यापक बदलाव हो सकता है और ऐसे नेताओं को जगह मिल सकती है जो प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं तथा जनता से सीधा संवाद रखते हैं।
देव ने अगले दो-तीन महीनों में परिणाम सामने आने की बात कही है। ऐसे में अब निगाहें इस पर रहेंगी कि संगठन की यह ‘सर्जरी’ सिर्फ बैठक और बयान तक रहती है या जिलों में इसका असर भी दिखाई देता है।


मोर्चों से भी मांगा रोडमैप
युवा मोर्चा सहित विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों से भी संगठन मजबूत करने का रोडमैप पूछा गया। कमजोर क्षेत्रों में जनाधार बढ़ाने के लिए लक्ष्य तय करने की बात कही गई।
कुल मिलाकर प्रदेश प्रभारी का संदेश तीन शब्दों में समझा जा सकता है—
गुटबाजी कम, दिखावा कम और जमीन पर काम ज्यादा।
अब असली परीक्षा भाषण की नहीं, अगले तीन महीनों में संगठन के भीतर दिखाई देने वाले बदलाव की होगी।