इटारसी // इस बार दीपावली सिर्फ रोशनी और आतिशबाजी का एक दिन का उत्सव नहीं होगी, बल्कि छह दिनों तक चलने वाली पर्वों की एक लंबी श्रृंखला लेकर आ रही है। तिथियों के घटने-बढ़ने और उदया तिथि व प्रदोष काल की अलग-अलग मान्यताओं के चलते इस बार त्योहारों का कैलेंडर भी कुछ खास बन गया है। सबसे दिलचस्प संयोग 8 नवंबर को रहेगा, जब सुबह रूप चौदस की परंपराएं निभाई जाएंगी और शाम को घर-आंगन में दीप जलाकर महालक्ष्मी की आराधना होगी। यानी एक ही दिन सुबह सौंदर्य और आरोग्य का पर्व तो शाम को सुख-समृद्धि की कामना का महापर्व।
इस बार दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस से होगी। धनतेरस पर हस्त नक्षत्र और त्रिपुष्कर योग का संयोग बन रहा है। इसे खरीदारी के लिए शुभ माना गया है। विशेष रूप से सोना-चांदी और नए सामान की खरीदारी के लिए दिन महत्वपूर्ण रहेगा। प्रदोष काल में धनतेरस पूजन के साथ यम दीपदान भी किया जाएगा।
एक दिन, दो पर्व का अनूठा संयोग
8 नवंबर को चतुर्दशी तिथि सुबह 11.28 बजे तक रहेगी, इसके बाद अमावस्या शुरू होगी। सुबह अभ्यंग स्नान और उबटन के साथ रूप चौदस मनाई जाएगी, जबकि शाम को प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन होगा। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5.54 से 7.50 बजे तक बताया गया है। इस दिन सौभाग्य, आयुष्मान और बुधादित्य योग का भी संयोग रहेगा।
दीपावली के अगले दिन भी अमावस्या का महत्व
9 नवंबर को उदया तिथि में कार्तिक अमावस्या होने से सोमवती अमावस्या का संयोग बनेगा। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व रहेगा। यानी दीपावली के दीपों की रोशनी के अगले दिन धार्मिक अनुष्ठानों और पुण्य स्नान की परंपरा भी निभाई जाएगी।
धनतेरस से भाईदूज तक छह दिन का उत्सव
इस बार पर्वों की पूरी श्रृंखला इस प्रकार रहेगी—
6 नवंबर, शुक्रवार: धनतेरस, हस्त नक्षत्र और त्रिपुष्कर योग, यम दीपदान।
7 नवंबर, शनिवार: मास शिवरात्रि और काली चौदस।
8 नवंबर, रविवार: सुबह रूप चौदस, शाम को दीपावली और महालक्ष्मी पूजन।
9 नवंबर, सोमवार: सोमवती अमावस्या, स्नान-दान का महत्व।
10 नवंबर, मंगलवार: गोवर्धन पूजा और अन्नकूट।
11 नवंबर, बुधवार: भाईदूज, बहनें भाइयों को तिलक कर उनकी लंबी उम्र की कामना करेंगी।
इस तरह धनतेरस से शुरू होने वाला दीपोत्सव भाईदूज तक छह दिनों में छह पर्वों की धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं को समेटेगा। इस बार त्योहारों की खासियत केवल तिथियों का आगे-पीछे होना नहीं, बल्कि एक ही दिन दो प्रमुख पर्वों का उत्सव और उसके अगले दिन सोमवती अमावस्या का संयोग भी है।
त्योहारों का कैलेंडरः एक दिन में दो पर्व, छह दिन तक दीपोत्सव का उल्लास 8 नवंबर को सुबह रूप चौदस, शाम को महालक्ष्मी पूजन; अगले दिन सोमवती अमा
8 नवंबर को सुबह रूप चौदस, शाम को महालक्ष्मी पूजन; अगले दिन सोमवती अमावस्या, 10 को गोवर्धन और 11 नवंबर को भाईदूज
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