भोपाल। मध्यप्रदेश में अगले साल से शुरू होने वाले चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस ने अपनी संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी अब नई टीम के सहारे मैदानी मोर्चे पर उतरने की तैयारी में है। इसके लिए प्रदेश से लेकर जिला और विधानसभा स्तर तक संगठन का ढांचा मजबूत करने की रणनीति बनाई गई है।
कांग्रेस की इस कवायद में सामाजिक और वर्ग आधारित संगठनों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) विभाग के प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद अब आदिवासी कांग्रेस और अनुसूचित जाति विभाग में भी जल्द नए अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की संभावना है। पार्टी का प्रयास है कि इन वर्गों के बीच संगठन की पहुंच बढ़े और स्थानीय समस्याओं को राजनीतिक अभियान से जोड़ा जा सके।
विधानसभा स्तर तक बनेंगी संगठन की इकाइयां
कांग्रेस की नई रणनीति में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव संगठन के विस्तार को लेकर है। अब तक विभागों और प्रकोष्ठों की गतिविधियां मुख्य रूप से प्रदेश और जिला स्तर तक सीमित थीं, लेकिन पहली बार विधानसभा स्तर पर भी इनकी इकाइयां गठित करने की तैयारी है।
इसके पीछे पार्टी की मंशा संबंधित सामाजिक वर्गों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने, स्थानीय नेतृत्व तैयार करने और चुनावी मुद्दों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने की है।
आदिवासी और अनुसूचित जाति विभाग में बदलाव की तैयारी
पार्टी सूत्रों के मुताबिक आदिवासी कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष रामू टेकाम को बदलने की तैयारी है। वहीं अनुसूचित जाति विभाग में प्रदीप अहिरवार के स्थान पर नए अध्यक्ष की नियुक्ति की संभावना जताई जा रही है।
ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पूर्व विधायक राजेंद्र मंडलोई और पवन पटेल को जिम्मेदारी दी गई है। अब दोनों अपने स्तर पर संगठन की नई टीम तैयार करेंगे। सेवादल की प्रदेश इकाई का गठन भी किया जा चुका है।
निष्क्रिय संगठनों को नए सिरे से मिलेगी जिम्मेदारी
कांग्रेस ने निष्क्रियता के चलते पहले विभिन्न विभागों और प्रकोष्ठों की प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक की इकाइयां भंग कर दी थीं। अब इन्हें नए सिरे से गठित कर सक्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पार्टी ने विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, व्यावसायिक और जनहित से जुड़े कुल 21 प्रकोष्ठों में नियुक्तियां की हैं। इनमें झुग्गी-झोपड़ी, सद्भावना, सफाई मजदूर, धर्म एवं नर्मदा, व्यावसायिक समाज, सहकारिता, कौमी एकता, फुटकर एवं लघु व्यवसाय, मंदिर एवं पुजारी, मसीह समाज, जनसमस्या, केश कला शिल्पी, वन एवं पर्यावरण, उपभोक्ता संरक्षण, पालक-अभिभावक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जैसे प्रकोष्ठ शामिल हैं।
संगठन विस्तार से चुनावी जमीन तैयार करने की कोशिश
कांग्रेस की यह पूरी कवायद केवल पदाधिकारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। पार्टी सामाजिक समीकरणों को साधने के साथ बूथ और विधानसभा स्तर पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।
नई नियुक्तियों के बाद सबसे बड़ी चुनौती इन संगठनों को सक्रिय रखने और उन्हें चुनाव तक लगातार मैदानी गतिविधियों से जोड़ने की होगी। देखना होगा कि नई टीम नियुक्तियों से आगे बढ़कर जनता के बीच कितना प्रभावी संगठन खड़ा कर पाती है।