नई दिल्ली,/घर खरीदने का सपना देख रहे हैं या पहले से होम लोन, कार लोन अथवा पर्सनल लोन की किस्त चुका रहे हैं, उनके लिए रिजर्व बैंक का बुधवार का फैसला जेब पर भारी पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.25 से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।
फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है, जब RBI ने रेपो रेट बढ़ाया है। इसका सबसे सीधा असर उन कर्जदारों पर पड़ सकता है, जिनकी ब्याज दरें रेपो रेट से जुड़ी हैं। अनुमान के मुताबिक देश में 10 में से करीब 7 कर्जदारों की ब्याज दरें रेपो रेट से लिंक हैं।
EMI बढ़ेगी या कर्ज चुकाने में और साल लगेंगे?
रेपो रेट बढ़ने का मतलब बैंकों के लिए RBI से मिलने वाले धन की लागत बढ़ना है। बैंक इसका असर ग्राहकों के कर्ज की ब्याज दरों पर डाल सकते हैं।
ऐसे में मौजूदा कर्जदारों के सामने आम तौर पर दो असर हो सकते हैं—EMI बढ़ेगी या समान EMI रखते हुए कर्ज की अवधि बढ़ जाएगी।
यानी जेब पर असर सिर्फ इस महीने की किस्त तक सीमित नहीं रहेगा। लंबी अवधि में ब्याज के रूप में कुल भुगतान भी बढ़ सकता है।
घर खरीदने वालों की बढ़ेगी चिंता
होम लोन लेने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण है। ब्याज दरें बढ़ने पर समान रकम का मकान खरीदने के लिए पहले की तुलना में अधिक EMI चुकानी पड़ सकती है।
दूसरी ओर, बैंक कर्ज की पात्रता का आकलन करते समय बढ़ी हुई EMI को ध्यान में रख सकते हैं। इससे कुछ ग्राहकों की कर्ज लेने की क्षमता घट सकती है।
RBI ने क्यों बढ़ाया रेपो रेट?
RBI ने यह फैसला ऐसे समय किया है, जब महंगाई को लेकर जोखिम बढ़ रहे हैं। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कमजोर रुपये और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका भी RBI के सामने है।
खराब मौसम और खाद्य महंगाई के जोखिम को भी केंद्रीय बैंक ने गंभीरता से लिया है।
असली झटका सिर्फ 0.25% का नहीं
RBI के फैसले में सिर्फ रेपो रेट की बढ़ोतरी ही महत्वपूर्ण नहीं है। केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति के रुख में भी बदलाव किया है।
अब ‘तटस्थ’ रुख की जगह ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी क्रमिक सख्ती का संकेत दिया गया है।
इसका मतलब यह माना जा रहा है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है। यदि महंगाई का दबाव आगे बढ़ता है तो आने वाली बैठकों में दरों में और बढ़ोतरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
अच्छी खबर भी—अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर RBI का भरोसा
महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाने के बावजूद RBI ने आर्थिक विकास को लेकर सकारात्मक अनुमान दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया गया है।
RBI के अनुसार विनिर्माण गतिविधियां मजबूत हैं, सेवा क्षेत्र में स्थिरता बनी हुई है और निजी खपत तथा निवेश आर्थिक वृद्धि के प्रमुख आधार बने हुए हैं।
लेकिन कमजोर मानसून, एल नीनो की आशंका, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक आपूर्ति बाधाएं अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बनी हुई हैं।
आम आदमी के लिए संदेश साफ
RBI का फैसला महंगाई पर नियंत्रण के लिए उठाया गया कदम है, लेकिन इसका तत्काल असर कर्ज लेने वालों की जेब पर पड़ सकता है।
यानी महंगाई से राहत की कोशिश के बीच EMI का दबाव बढ़ सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक रेपो रेट बढ़ोतरी का कितना हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाते हैं और आने वाले महीनों में RBI ब्याज दरों को लेकर कितना सख्त रहता है।
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